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Quran Mein Hazrat Isa Masih Alayhi SalamKa Zikr

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कुरआन में इसा मसीह का ज़िक्र ! कुरआन में हज़रत ईसा मसीह (अलैहिस्सलाम) का ज़िक्र बहुत आदर और सम्मान के साथ किया गया है। उन्हें ईसा इब्न मरियम (मरियम का बेटा) कहा जाता है, और वे अल्लाह के बड़े पैग़म्बरों में से एक हैं।  कुरआन में उनका नाम 25 बार आता है, और वे मसीह (अल-मसीह), कलिमतुल्लाह (अल्लाह का कलिमा), रूहुल्लाह (अल्लाह की रूह) जैसे ख़िताबों से नवाज़े गए हैं। कुरआन के अनुसार: वे कुंवारी मां हज़रत मरियम से बिना बाप के पैदा हुए (एक बड़ा मोजिज़ा )।  उन्होंने कई मोजिज़े दिखाए, जैसे मिट्टी से पक्षी बनाकर उसमें जान फूंकना, अंधों और कोढ़ियों को शिफ़ा देना, मुर्दों को ज़िंदा करना  (सब अल्लाह की इजाज़त से)।  उन्हें इंजील दी गई थी।  वे अल्लाह के बंदे और रसूल हैं, न कि अल्लाह का बेटा या खुदा (कुरआन तौहीद पर ज़ोर देता है और त्रिएकता को ख़ारिज करता है)।  उन्हें सूली पर नहीं चढ़ाया गया, बल्कि अल्लाह ने उन्हें ज़िंदा अपनी तरफ़ उठा लिया।  मुख्य सूरहें और आयतें जहां ईसा मसीह का ज़िक्र है: सूरह आले इमरान (3:45-59):  फरिश्तों ने मरियम को खुशख़बरी दी:...