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23 Piyarai Nabi SAW bahut Mehman Nawaz thai

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प्यारे नबी (सल्ल.) कैसे थे? (23) प्यारे नबी (सल्ल.) बहुत मेहमान-नवाज़ थे Piyarai Nabi SAW kaisai thai  Piyarai Nabi SAW bahut Mehman Nawaz thai अल्लाह के नबी (सल्ल.) मेहमानों का बहुत ख़याल रखते थे। इस काम के लिए आप (सल्ल.) ने हज़रत बिलाल (रज़ि.) को ख़ास तौर पर नियुक्त कर दिया था ताकि मेहमान की खातिरदारी ठीक से हो सके। बाहर से जो वफ़्द (प्रतिनिधिमण्डल) आते आप (सल्ल.) ख़ुद उनकी खातिर और आवभगत करते थे। अगर उनको कोई माली ज़रूरत होती तो आप (सल्ल.) उसका भी इन्तिज़ाम कर देते। आप (सल्ल.) की खातिरदारी गैर-मुस्लिम और मुसलमान दोनों के लिए आम थी। कोई गैर-मुस्लिम भी आप (सल्ल.) के यहाँ आ जाता तो उसकी ख़ातिरदारी भी मुसलमान मेहमानों की तरह से होती। अकसर ऐसा होता कि घर में खाने-पीने का जो सामान होता वह मेहमानों के सामने रख दिया जाता और आप (सल्ल.) के घरवाले फ़ाक़ा से (बगैर खाए-पिए) रह जाते। एक दिन असहाबे-सुफ़्फ़ा को लेकर आप (सल्ल.) हज़रत आइशा (रज़ि.) के घर पहुँचे (खुद आपके यहाँ कुछ न था) और खाना लाने के लिए कहा। चूनी का पका हुआ खाना लाया गया, फिर छुहारे का हरीरा आया और आखिर में एक बड़े प...

6 Piyarai Nabi SWA Mithai bol boltai thai

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प्यारे नबी (सल्ल.) कैसे थे? (6) प्यारे नबी (सल्ल.) मीठे बोल बोलते थे Piyarai Nabi SWA kaisai thai  Piyarai Nabi SWA Mithai bol boltai thai अल्लाह के नबी (सल्ल.) जब भी किसी से बात करते तो उसके पद और अदब व सम्मान का ध्यान रखते थे। इससे आपसी सम्बन्ध अच्छे रहते हैं और मेल-जोल बढ़ता है। अच्छी आदतों में सलाम करना, शुक्रिया अदा करना, हाल-चाल पूछना, नसीहत करना और नेकी की शिक्षा देना भी शामिल है। प्यारे नबी (सल्ल.) ने फ़रमाया, "जो व्यक्ति अल्लाह और आख़िरत (परलोक) के दिन पर विश्वास रखता है उसको चाहिए कि ज़बान से अच्छी बात निकाले, वरना चुप रहे।" इसका मतलब यह है कि अगर हम सच्चे मुसलमान बनना चाहते हैं तो हमें बद-कलामी और ऐसी बातों से बचना चाहिए जिससे दूसरों का दिल दुखे। एक बार नबी (सल्ल.) ने फ़रमाया, "अच्छी बात सदक़ा है" यानी मीठी ज़बान का प्रयोग करके दूसरों के दिल जीत लेना बहुत बड़ी नेमत है। एक सहाबी ने पूछा, " ऐ अल्लाह के नबी! नजात (मुक्ति) कैसे हासिल हो सकती है ?" आप (सल्ल.) ने कहा, "अपनी ज़बान को काबू में रखो।" यानी पहले तोलो फिर बोलो, ताकि तु...

5 Piyarai Nabi SWA ko Ghibat sai Nafrat Thi

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प्यारे नबी (सल्ल.) कैसे थे?  (5)प्यारे नबी (सल्ल.) को ग़ीबत से नफ़रत थी Piyarai Nabi SWA kaisai thai  Piyarai Nabi SWA ko Ghibat sai Nafrat Thi गीबत (पीठ पीछे बुराई करने) से आपसी सम्बन्ध खराब होते हैं, अच्छे दिल बुरे हो जाते हैं, इज्ज़त और आबरू खतरे में पड़ जाती है। इससे नफ़रत की भावना पैदा होती है। इसी लिए तो क़ुरआन मजीद में ग़ीबत करनेवाले की मिसाल ऐसे व्यक्ति से दी गई है जो अपने मरे हुए भाई का गोश्त खाता है। तौबा-तौबा! कितनी घिनौनी आदत है किसी की पीठ पीछे बुराई करना। ग़ीबत के बारे में प्यारे नबी (सल्ल.) से प्रश्न किया गया कि "ऐ अल्लाह के नबी! ग़ीबत किसे कहते हैं ?"' नबी (सल्ल.) ने कहा, "तुम्हारा अपने भाई की उन बातों की इस तरह चर्चा करना जिनको वह सुने तो उसे तकलीफ़ पहुँचे।” फिर पूछा गया कि "अगर मेरे भाई में वह बुराई मौजूद हो जिसको बयान किया गया है ?" नबी (सल्ल.) ने उत्तर दिया, "अगर वह बुराई उसमें मौजूद है तो तुमने उसकी गीबत की और अगर वह बुराई उसमें नहीं है तो तुमने उसपर बोहतान (झूठा इलज़ाम) लगाया।" अल्लाह तआला इस बुरी आदत से हम सबको ब...