6 Piyarai Nabi SWA Mithai bol boltai thai

प्यारे नबी (सल्ल.) कैसे थे?

(6) प्यारे नबी (सल्ल.) मीठे बोल बोलते थे

Piyarai Nabi SWA kaisai thai 
Piyarai Nabi SWA Mithai bol boltai thai


अल्लाह के नबी (सल्ल.) जब भी किसी से बात करते तो उसके पद और अदब व सम्मान का ध्यान रखते थे। इससे आपसी सम्बन्ध अच्छे रहते हैं और मेल-जोल बढ़ता है। अच्छी आदतों में सलाम करना, शुक्रिया अदा करना, हाल-चाल पूछना, नसीहत करना और नेकी की शिक्षा देना भी शामिल है।


प्यारे नबी (सल्ल.) ने फ़रमाया, "जो व्यक्ति अल्लाह और आख़िरत (परलोक) के दिन पर विश्वास रखता है उसको चाहिए कि ज़बान से अच्छी बात निकाले, वरना चुप रहे।" इसका मतलब यह है कि अगर हम सच्चे मुसलमान बनना चाहते हैं तो हमें बद-कलामी और ऐसी बातों से बचना चाहिए जिससे दूसरों का दिल दुखे।


एक बार नबी (सल्ल.) ने फ़रमाया, "अच्छी बात सदक़ा है" यानी मीठी ज़बान का प्रयोग करके दूसरों के दिल जीत लेना बहुत बड़ी नेमत है।


एक सहाबी ने पूछा, " ऐ अल्लाह के नबी! नजात (मुक्ति) कैसे हासिल हो सकती है ?" आप (सल्ल.) ने कहा, "अपनी ज़बान को काबू में रखो।" यानी पहले तोलो फिर बोलो, ताकि तुम्हारी बातों से किसी का दिल न दुखने पाए और तुम्हारी ज़बान से ऐसे शब्द न निकलें जिनसे दूसरों को तकलीफ़ पहुँचे।


एक बार नबी (सल्ल.) ने जन्नत की खूबियाँ बयान कीं। एक सहाबी व्याकुल होकर बोले, "ऐ अल्लाह के नबी यह जन्नत किसको मिलेगी?" नबी (सल्ल.) ने फ़रमाया, "जिसने अपनी ज़बान से बुरी बातें नहीं निकाली होंगी।"


देखिए, जन्नत प्राप्त करने का कितना आसान तरीक़ा है! आइए हम प्रतिज्ञा करें कि अपनी ज़बान से कोई बुरी बात नहीं निकालेंगे।                  (जारी है)


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