Istaqbal E Ramzan Kaisa ho Roza Kiya hai

इस्तकबाल ए रमज़ान कैसा हो?
रमाज़ान की आमद का अहतमाम कैसे करें ?
रमज़ान जैसी नयमत की कद्र कैसे करें ? 
हम रमज़ान में कैसे कामयाब हो जाए ?
हम रमज़ान की बरकतो नयमतो को कैसे हासिल करें?

Istaqbal E Ramzan Kaisa ho Roza Kiya hai?



हमें सबसे पहले रमज़ान माह की कद्रो किमत समझना होगी की इस माह की अल्लाह ने इतनी फज़ीलत ओर अहमियत क्यों ब्यान की है इस माह में रोज़े क्यों फ़र्ज़ किए हैं? इस माह की इतनी अहमियत क्यों है? इन सावालो का जवाब आप को कुरआन में मिलता है 


Surat No 2 : سورة البقرة - Ayat No 185 

شَہۡرُ رَمَضَانَ الَّذِیۡۤ اُنۡزِلَ فِیۡہِ الۡقُرۡاٰنُ ہُدًی لِّلنَّاسِ وَ بَیِّنٰتٍ مِّنَ الۡہُدٰی وَ الۡفُرۡقَانِ ۚ فَمَنۡ شَہِدَ مِنۡکُمُ الشَّہۡرَ فَلۡیَصُمۡہُ ؕ وَ مَنۡ کَانَ مَرِیۡضًا اَوۡ عَلٰی سَفَرٍ فَعِدَّۃٌ مِّنۡ اَیَّامٍ اُخَرَ ؕ یُرِیۡدُ اللّٰہُ بِکُمُ الۡیُسۡرَ وَ لَا یُرِیۡدُ بِکُمُ الۡعُسۡرَ ۫ وَ لِتُکۡمِلُوا الۡعِدَّۃَ وَ لِتُکَبِّرُوا اللّٰہَ عَلٰی مَا ہَدٰىکُمۡ وَ لَعَلَّکُمۡ تَشۡکُرُوۡنَ ﴿۱۸۵﴾


रमज़ान वो महीना है जिसमें क़ुरआन उतारा गया, जो इन्सानों के लिये सरासर रहनुमाई है और ऐसी वाज़ेह तालीमात पर मुश्तमिल [ आधारित] है जो सीधा रास्ता दिखानेवाली और सच और झूठ का फ़र्क़ खोलकर रख देनेवाली हैं। इसलिये अब से जो शख़्स इस महीने को पाए, उसके लिये ज़रूरी है कि इस पूरे महीने के रोज़े रखे। और जो कोई बीमार हो या सफ़र पर हो, तो वो दूसरे दिनों में रोज़ों की गिनती पूरी करे। [ 186] अल्लाह तुम्हारे साथ नरमी करना चाहता है, सख़्ती करना नहीं चाहता। इसलिये ये तरीक़ा तुम्हें बताया जा रहा है, ताकि तुम रोज़ों की गिनती पूरी कर सको और जिस सीधे रास्ते पर अल्लाह ने तुम्हें लगाया है, उस पर अल्लाह की बड़ाई का इज़हार व एतिराफ़ करो और शुक्रगुज़ार बनो। [ 187]


इस आयत में साफ ज़ाहिर होता है की रमज़ान की जो कद्रो किमत अहमियत बड़ी है हादीस में जो रमज़ान की फाज़ीलत ओर अहमियत ब्यान की गई है वह कुरआन की बरकत से है इस महिने को दुसरे महिनो से जो ज़्यादा फाज़िलत इस लिए हासिल है क्योंकि इस माह में कुरआन नाज़िल हुआ है ओर फिर इसी की बरकत से इस माह में रोज़े फ़र्ज़ किए गए हैं ओर रोज़े क्यों फ़र्ज़ किए गए हैं उस का भी अल्लाह कुरआन में मक़सद को वाज़े करता है 

Surat No. 2 Ayat NO. 183 

ऐ लोगो जो ईमान लाए हो! तुम पर रोज़े फ़र्ज़ कर दिये गए, जिस तरह तुमसे पहले नबियों के माननेवालों पर फ़र्ज़ किये गए थे। इससे उम्मीद है कि तुममें परहेज़गारी (तक़वा) की सिफ़त [ गुण] पैदा होगी। [ 183] 


इस आयत में आप को वाज़ेह होगा या होगा की अल्लाह का मकसद रोज़े के ज़रिए आप को तकवे वाला यानी मुत्ताक़ी बनाना चाहता है 


तक़वा क्या है :- तक़वे से मुराद है की हम में अल्लाह का डर,खोफ हो | अल्लाह ओर उसके रसुल की दी हुई तालिमात पर अम्ल हो | बुराई से बचना | नफ्स पर काबू पाना | अल्लाह से टुट कर मोहब्बत करना यह है यह है तक़वा ओर अल्लाह हमें रोज़े के ज़रिए से मुत्ताकी बनाना चाहता है यह है रोज़े का मकसद 


अब हम अपनी असल बात पर आते हैं की हम रमज़ान का किस अंदाज़ से इस्तकबाल करें की हम कामयाब हो जाए 

    ऐसे कोन से अम्ल करें ओर कोन से अम्ल करने से बचे जिस से हमारा अल्लाह हम से राज़ी हो जाए इस रमज़ान हमारी मग़फिरत हो जाए 


हमें हमारे लिए इस रमज़ान एक ख़ास प्लान बनाना होगा जिसे हम अपना कर रमज़ान सही तरिके से गुज़ार सकें हमें रमज़ान बिताने के लिए एक ख़ास मंसुबा बनाना होगा हमें रमज़ान ऐसे गुज़रना हैं जिसमें हमारी मग़फिरत हो जाए 


सिरत की किताबों में पढ़ने में आता है की सहाबा रमज़ान के छः महीने पहले से उसको हासिल करने के लिए दुआ करते थे ओर उस के लिए फिक्रमंद हुआ करतें थे ओर रमज़ान बित जाने पर छः माह तक उस में किए हुए आमाल की कुबूलिय की दुआं किया करते थे ऐसी अहमियत के साथ साहाबा रमज़ान का इस्तकबाल किया करते थे 


इस रमज़ान हम क्या करें ओर क्या ना करें 


करने वाले काम:-  (1) हमें हमारी ग़फलत को दुर करना होगा रमज़ान को लेकर संजिदा होना होगा 

(2) नेकियां करने में कोताही नहीं बरतना है 

(3) फ़र्ज़ नमाज़ बा जमाअत तकबिर ए उला के साथ पढना है 

(4) कुरआन की तिलावत खुब करना होगी 

(5) कुरआन को समझ कर पढ़ना है 

(6) सुरतो को याद करना है 

(7) सुन्नत नफिल नमाज़ो का अहतिमाम करना है ख़ास तोर से ताहज्जुद 

(8) पुरा हिसाब-किताब कर के ज़कात का निकालना 

(9) ग़रिबो की दस्तगिरी करना ख्याल रखना 

(10) दुआ जिक्र अज़्कार में वक्त गुज़ारना 

(11) दुआ में पुरी दुनिया ओर अपने मुल्क के मज़लूम मुस्लिम भाईयों को याद रखना 


ना करने वाले काम:- (1) वक्त को ज़ाया ना करें 

(2) नफ्स पर काबू रखें 

(3) लड़ाई झगड़ा गाली गलोच ना करें 

(4) लायानी फहश गुफ्तगू ना करें 

(5) बद नज़री ना करें फहश उर्यानियत गंदे मनाज़िर ना देखें 

(6) खुदा ना खास्ता कोई नशा करता है तो वह नशा ना करें 

(7) किसी से बदकलामी ना करें किसी का दिल ना दुखाएं 

(8) लायानी काम में वक्त को जाया ना करें 

(9) सोशल मीडिया से रमज़ान में दुरी बना लें 

(10) बजारो में होटलों पर घर के बाहर ओटलो पर बैठ कर बात चित करने गप्पे मारने में वक्त ज़ाया ना करें 

(11) रमज़ान की रातो में इधर-उधर घुमकर बैठ कर वक्त ज़ाया ना करें 


इस बार का रमज़ान हमारे लिए एक बहुत बड़ी तबदिली इंकलाब लाने का बाईस बने रमज़ान का महीना हमारे लिए एक बहुत ही बेहतरीन मोका होता है इस में अल्लाह की खास रहमते नुसरते उतरती हैं यह हमारे लिए अल्लाह की तरफ़ से एक बहुत बड़ा तोहफ़ा है इस में अल्लाह शेतान को केद कर देता है ओर नेकियों में इज़ाफ़ा कर देता है एक नेकी के बदले 70 नेकियां करने का अज्र वा सवाब आता करता है माहोल तब्दील हो जाता है नेकियां करने का एक अलग ही जज़्बा ओर शोक़ पेदा हो जाता है जो मस्जिदे फज्र तो छोड़ो ज़ोहर ओर अस्र में खाली हुआ करती है वह अगली ही सुबह फज्र में भर जाती है बल्कि मग़रीब का चांद दिखाते ही लोगों का हुजूम मस्जिद की तरफ़ आने लग जाता है ओर जो लोग फज्र से पहले उठकर सहरी करतें हैं वह देर रात तक तरावीह जैसी लम्बी नमाज़ में देर तक खड़े रहते हैं यह रमज़ान की ही बरकतें है हमारे रवय्यै में यह एक बड़ी तबदिली आती है लेकिन अफसोस इस बात की है यह नेकियां करने की तबदिली जिस तेज़ी से आती हैं उतनी ही तेज़ी से यह जस्बा ठंडा पड़ जाता है ईद का चांद दिखाते ही लोगों की तादाद फिर पहले जैसी रह जाती है लेकिन इस बार हमें अपने अन्दर एक मुश्तकील अंदाज़ की तबदिली करनी है ओर यह तबदिली अब अगले रमज़ान तक रहें गी ऐसा अज़म ओर इरादा करें 


अल्लाह से दुआ है की यह रमज़ान हमारे लिए मग़फिरत का रमज़ान हो आखिरत की कामयाबी हासिल करने वाला रमज़ान हो उम्मत की कामयाबी कामरानी हासिल करने वाला रमज़ान हो उम्मत की मज़्लूमियत बुज़दिली ख़त्म करने वाला रमज़ान हो 


अगर आप को यह लेख अच्छा लगा तो दुसरो से भी शयर करें कुछ कमी लेंगे तो कमेंट कर के इसलाह करें 

अल्लाह हाफ़िज़ दुआ में याद रखें 


#Ramzan #Quran #Roza #Suom #Namaz #Taraweeh #Tahajjud 


टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

Quran Mein Hazrat Isa Masih Alayhi SalamKa Zikr

1 Piyarai Nabi SWA Baat Kaisai Kartai thai