32 Piyarai Nabi SWA Quran khub zada padtai thai
प्यारे नबी (स अ व) कैसे थे?
(32) प्यारे नबी (स अ व) को कुरआन की तिलावत का बहुत शौक़ था
Piyarai Nabi SWA kaisai thai?
Piyarai Nabi SWA ko Quran ki Tilawat ka bahut shok tha
Piyarai Nabi SWA Quran khub zada padtai thai
अल्लाह के नबी (स अ व) ने क़ुरआन मजीद पढ़ने का जो वक्त तय कर रखा था उसके अलावा भी हर वक़्त आप (स अ व) की पाक ज़बान क़ुरआन मजीद की तिलावत से तर रहती थी। उठते-बैठते, चलते फिरते, यहाँ तक कि हर हाल में आप (स अ व) तिलावत करते रहते। आप (सल्ल.) बड़ी प्यारी आवाज़ में तिलावत करते थे। आप (सल्ल.) की हिदायत थी कि “क़ुरआन को अपनी आवाज़ से जीनत (शोभा) दो, जो ऐसा न करे वह हमें से नहीं।"
नबी (सल्ल.) दूसरों की ज़बान से भी क़ुरआन मज़ीद सुनने के बहुत शौक़ीन थे। सहाबा (रज़ि.) से क़ुरआन सुनाने की फ़रमाइश किया करते थे। एक बार हज़रत अब्दुल्लाह बिन मसऊद (रज़ि.) को क़ुरआन सुनाने का हुक्म दिया। उन्होंने बहुत मधुर स्वर में तिलावत शुरू की। आप (सल्ल.) इतने प्रभावित हुए कि आँखों से आँसू जारी हो गए।
क़ुरआन मजीद की तिलावत के बारे में हमें यह हिदायतें (निर्देश) मिलती हैं:
(1) वुजू करके तिलावत करना चाहिए और जिस जगह बैठकर तिलावत करें वह जगह पाक और साफ़ होनी चाहिए,
(2) तिलावत के वक्त काबा की तरफ मुँह करके बैठना चाहिए और दिल लगाकर ध्यान के साथ तिलावत करना चाहिए, और
(3) तिलावत दरमियानी आवाज़ से करना चाहिए। (जारी है)
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