7 Piyarai Nabi SWA kis tarha khatai pitai thai
प्यारे नबी (सल्ल.) कैसे थे
(7) प्यारे नबी (सल्ल.) किस तरह खाते-पीते थे ?
Piyarai Nabi SWA kaisai thai
Piyarai Nabi SWA kis tarha khatai pitai thai
खाने-पीने के बारे में प्यारे नबी (सल्ल.) का यह तरीक़ा था कि जो चीज़ सामने रख दी जाती, आप (सल्ल.) हँसी-खुशी खा लेते, बशर्ते कि वह पाक और हलाल हो। अगर तबीअत कराहत महसूस करती तो हाथ रोक लेते मगर दस्तरखान पर खाने को बुरा न कहते।
आप (सल्ल.) हाथ धोकर खाना शुरू करते और प्लेट के किनारे से खाते। बीच में हाथ न डालते। अगर प्लेट में कुछ बच जाता तो आप (सल्ल.) उसे पी लेते या फिर उँगली से चाट लेते। खाने के बाद पहले आप (सल्ल.) उँगलियाँ चाटते और फिर हाथ धो लेते। टेक लगाकर खाने से आप (सल्ल.) ने मना किया है।
प्यारे नबी (सल्ल.) पानी हमेशा बैठकर पीते। आप (सल्ल.) ने फ़रमाया, "पानी पियो तो चूसकर पियो, बरतन में साँस न लो, बल्कि बरतन हटाकर साँस लो। एक ही साँस में पानी न पियो, दो या तीन बार में पियो। इस तरह पीना फ़ायदेमन्द है।"
आप (सल्ल.) बिस्मिल्लाह (शुरू अल्लाह के नाम से) करके खाना-पीना शुरू करते। जब खा-पी चुकते तो अलहमदुलिल्लाह (अल्लाह का शुक्र है) कहते या फिर यह दुआ पढ़ते
अल्हम्दुलिल्लाहिल्लज़ी अत अ-म-ना व सक़ाना व ज-अ-ल-ना मिनल मुस्लिमीन।
"सारी तारीफें और शुक्र अल्लाह के लिए है जिसने हमें खिलाय-पिलाया और हमें फ़रमाँबरदारों में से बनाया।" (जारी है)
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