26 Piyarai Nabi SWA Sacrifice Esaar Qurbani Tiyag Kai aadi thai

प्यारे नबी (स अ व) कैसे थे?
(26) प्यारे नबी (स अ व) ईसार कुर्बानी त्याग के आदी थे

Piyarai Nabi SWA kaisai thai 

Piyarai Nabi SWA Sacrifice Esaar Qurbani Tiyag Kai aadi thai


सखावत का सबसे ऊँचा दर्जा ईसार (त्याग) कहलाता है। इसका मतलब यह है कि अपनी ज़रूरत रोककर दूसरे की ज़रूरत पूरी कर देना। खुद भूखा रहे और दूसरों को खिलाए, खुद तकलीफ़ उठाए और दूसरों को आराम पहुँचाने की कोशिश करे इससे आपस के सम्बन्ध मज़बूत होते हैं, भाईचारा पैदा होता है और फिर अल्लाह भी ख़ुश होता है।


अल्लाह के नबी (सल्ल.) की ज़िन्दगी इस तरह के वाक़िआत से भरी पड़ी है। एक बार एक मुसलमान औरत ने अपने हाथ से एक चादर बुनकर नबी (सल्ल.) की ख़िदमत में तोहफ़े के तौर पर पेश की। उस वक़्त आप (सल्ल.) को चादर की बहुत ज़रूरत थी। आप (सल्ल.) ने उस तोहफ़े को क़बूल कर लिया। उसी वक़्त एक सहाबी ने कहा, "ऐ अल्लाह के नबी! यह चादर तो बहुत खूबसूरत है, मुझे इनायत कर दें तो बड़ा अच्छा हो।"


प्यारे नबी (सल्ल.) ने ईसार से काम लिया और फ़ौरन वह चादर उन सहाबी को दे दी जबकि आपको ख़ुद ज़रूरत थी, मगर आप (सल्ल.) ने उनकी ज़रूरत को तरजीह दी।


ऐसी ही मिसालें हमारे लिए अँधेरे का चिराग़ है। अल्लाह हमें उनपर अमल करने की तौफ़ीक़ दे। अमीन!                    (जारी है)


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