8 Piyarai Nabi SWA bahut sharmilai thai

 प्यारे नबी स अ व कैसे थे

 (8) प्यारे नबी स अ व बहुत शर्मीले थे


Piyarai Nabi SWA kaisai thai 
Piyarai Nabi SWA bahut sharmilai thai 


लाज और शर्म इनसान की फ़ितरत में है। यही वह गुण है जिससे हमारे अन्दर बहुत-सी खूबियाँ पैदा होती हैं और परवरिश पाती हैं और हम बहुत-सी बुराइयों से बचे रहते हैं। इसी लिए तो कहा गया है कि "शर्म ईमान का एक भाग है," जिसमें लाज और शर्म नहीं वह ईमानदार नहीं।


प्यारे नबी (सल्ल.) ने फ़रमाया, "नंगे होने से बचो क्योंकि तुम्हारे साथ हर समय अल्लाह के फ़रिश्ते रहते हैं, मगर जब तुम पेशाब-पाखाने को जाते हो तो वह अलग हो जाते हैं, तो तुम उनसे शर्म करो और उनका खयाल रखो।"


आप को प्यारे नबी (सल्ल.) के बचपन की वह घटना तो याद होगी जब काबा की दीवार बनाई जा रही थी। बड़ों के साथ बच्चे भी अपने कन्धों पर पत्थर रखकर ला रहे थे। प्यारे नबी (सल्ल.) भी उनमें शरीक थे। जब कन्धे दुखने लगे तो लड़कों ने अपने-अपने तहबन्द खोलकर कन्धों पर रख लिए। नबी (सल्ल.) के चचा ने आप (सल्ल.) से ऐसा ही करने को कहा। जब बहुत ज़ोर देकर कहा तो मजबूरी की हालत में आप (सल्ल.) ने अपना तहबन्द खोलना चाहा तो शर्म की वजह से बेहोश हो गए। जब चचा ने यह देखा तो मना कर दिया.


देखा आपने हमारे नबी (सल्ल.) कितने शर्मीले थे। आइए हम भी बेशर्मी की बातों से बचें ताकि हमारा अल्लाह हमसे खुश हो।                  (जारी है)


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