19 Piyarai Nabi SAW kaisai thai Piyarai Nabi SAW mamlai Kai saaf thai

प्यारे नबी (सल्ल.) कैसे थे?
(19) प्यारे नबी (सल्ल.) मामले के साफ थे Piyarai Nabi SWA kaisai thai Piyarai Nabi SWA Mamlai Kai Saaf thai

Piyarai Nabi SAW kaisai thai ?

Piyarai Nabi SAW mamlai Kai saaf thai

    

अल्लाह के नबी (सल्ल.) की अमानतदारी और मामलात (लेन-देन) की सफाई की चर्चा बयान से बाहर है। ये खूबियाँ आप (सल्ल.) की पाक ज़ात में इस तरह नुमायाँ थीं कि आप (सल्ल.) के दुश्मन भी उनका इनकार न कर सके। यही वजह है कि "सादिक़" (सच्चा) और "अमीन" (अमानतदार) की उपाधि आपको खानदानवालों ने नहीं, दोस्तों ने नहीं, बल्कि आप (सल्ल.) के दुश्मनों ने दी थी और वे इसी उपाधि से आपको पुकारा करते थे। मक्का के मुश्रिकों के दिल आप (सल्ल.) की तरफ़ से ईर्ष्या, नफ़रत और दुश्मनी से भरे हुए थे मगर अपनी अमानतें (रुपया-पैसा, ज़ेवर आदि) वे आप (सल्ल.) ही के हवाले कर के सन्तुष्ट होते थे आप (सल्ल.) के सिवा वे किसी दूसरे पर भरोसा नहीं करते थे। आपको याद होगा कि मक्का से हिजरत करते वक़्त भी अल्लाह के नबी (सल्ल.) ने दुश्मनों की अमानतों को वापस करने का कितना अच्छा इन्तिज़ाम किया था।


एक बार नबी (सल्ल.) ने किसी से एक ऊँट उधार लिया। जब वापस किया तो उससे बेहतर ऊँट वापिस किया और कहा, "सबसे अच्छे वे लोग हैं जो उधार को अच्छी तरह से अदा करते हैं।"          (जारी है)


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