15 Piyarai Nabi kaisai thai ? Piyarai Nabi SAW Ko Safayi aur Sadgi Pasand thi
प्यारे नबी (सल्ल.) कैसे थे
(15) प्यारे नबी (सल्ल.) को सफ़ाई और सादगी पसन्द थी
Piyarai Nabi SWA kaisai thai ?
Piyarai Nabi SAW Ko Safayi aur Sadgi Pasand thai
प्यारे नबी (सल्ल.) सफाई, सुथराई और पाकीज़गी का बहुत खयाल रखते थे। इसी लिए तो आप (सल्ल.) ने फरमाया है:
"सफ़ाई आधा ईमान है।"
एक बार एक व्यक्ति बहुत ही मैले कपड़े पहनकर आपके पास आया तो आप (सल्ल.) ने फ़रमाया, "क्या यह आदमी अपने कपड़े धोने की तकलीफ़ भी नहीं उठा सकता?"
एक बार एक खुशहाल (धनवान) व्यक्ति आपके पास आया। वह बहुत ही घटिया कपड़े पहने हुए था। आप (सल्ल.) ने उससे कहा, 'अल्लाह ने तुमको माल और दौलत दी है, उसका इज़हार तुम्हारी ऊपरी हालत से भी होना चाहिए।"
मस्जिद की दीवारों पर अगर थूक वगैरा के निशान आप (सल्ल.) देखते तो आप (सल्ल.) को बहुत ख़राब लगता। आप (सल्ल.) खुद छड़ी से खुरचकर उसे साफ़ कर देते। मस्जिद में खुशबू के लिए लोबान वग़ैरा जलाने की हिदायत करते।
प्यारे नबी (सल्ल.) ख़ुद भी सादा ज़िन्दगी गुज़ारते थे और सहाबा (रज़ि.) को भी इसी की नसीहत करते। आप (सल्ल.) अपना काम खुद कर लिया करते थे।
इस्लाम से पहले अरब के रहनेवालों में सफ़ाई-सुथराई बिल्कुल न थी। वे जहाँ चाहते थूक देते और रास्ते में पेशाब या पाखाना कर दिया
करते थे। प्यारे नबी (सल्ल.) इस आदत को बहुत नापसन्द करते थे और इससे मना करते थे हदीसों में बहुत-सी रिवायतें मौजूद हैं कि नबी (सल्ल.) ने उन लोगों पर लानत की है जो रास्तों में या पेड़ों की छाया में पेशाब-पाखाना करते हैं। अमीर लोग अपनी काहिली की वजह से किसी बरतन में पेशाब कर लिया करते थे। आप (सल्ल.) ने इसको भी मना किया है। आप (सल्ल.) ने बैठकर पेशाब करने की हिदायत की है।
अरब में पेशाब करके इस्तिंजा करने या पेशाब से कपड़ों को बचाने का कोई दस्तूर (रिवाज) न था। नबी (सल्ल.) एक बार कहीं जा रहे थे, रास्ते में दो क़ब्रें नज़र आईं,आप (सल्ल.) ने फ़रमाया, "इनमें से एक पर इसलिए अज़ाब हो रहा है कि वह अपने कपड़ों को पेशाब की छीटों से नहीं बचाता था।" (जारी है)
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