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30 Piyarai Nabi SWA Ghair Muslim ki bhi Ayadat dekhbhal kartai thai

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प्यारे नबी (स अ व) कैसे थे? (30) प्यारे नबी (स अ व) ग़ैर-मुस्लिमों की भी इयादत करते थे Piyarai Nabi SWA kaisai thai  Piyarai Nabi SWA Ghair Muslim ki bhi Ayadat  dekhbhal kartai  thai   सिर्फ़ मुसलमानों के साथ ही नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) का यह तरीक़ा न था, बल्कि ग़ैर-मुस्लिमों के साथ भी आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) का ऐसा ही सुलूक था। आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) तो अपने दुश्मनों तक के पास उनकी बीमारी का हाल पूछने जाते। आपने पढ़ा होगा कि जिस रास्ते से नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) का निकलना होता था वहीं पर एक यहूदी का घर था। वह आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) को बहुत सताया करता था। जब आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) उस रास्ते से गुज़रते तो वह आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) पर कूड़ा-करकट फेंक दिया करता था। आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) उससे कुछ न कहते थे। कपड़े झाड़कर मुस्कराते हुए गुज़र जाते। इत्तिफ़ाक़ की बात, एक दिन उसने आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) पर कूड़ा नहीं फेंका। नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) को बहुत हैरत हुई। लोगों से उसके बारे में मालूम किया। पता च...

29 Piyarai Nabi SWA Bimar ki daikhbhal Ayadat kartai thai

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प्यारे नबी (स अ व.) कैसे थे? (29) प्यारे नबी (स अ व) बीमारों की देखभाल करते थे Piyarai Nabi SWA kaisai thai Piyarai Nabi SWA Bimar ki daikhbhal Ayadat kartai thai  अल्लाह के नबी (सल्ल.) जब भी किसी की बीमारी की ख़बर सुनते तो उसका हाल-चाल मालूम करने के लिए ज़रूर जाते, बड़े-छोटे और अमीर-गरीब में कोई फ़र्क न करते। प्यारे नबी (सल्ल.) मरीज़ के पास जाते, उसके सिरहाने बैठते, सिर और नब्ज़ पर हाथ रखते, हाल-चाल मालूम करते, उसे तसल्ली देते और फिर सेहत के लिए सात बार यह दुआ करते - أسأل الله العظيم رب العرش العظيم ان يشفيك  “मैं बड़ाईवाले अल्लाह से, जो अर्श-अज़ीम (बड़े आकाश) का रब है, सवाल करता हूँ कि वह तुझे ठीक कर दे।" हज़रत अब्दुल्लाह बिन अब्बास (रज़ि.) फ़रमाते हैं कि "मरीज़ के पास ज़्यादा देर तक न बैठना और शोर-गुल न करना सुन्नत है।" नबी (सल्ल.) ने फ़रमाया, "क़ियामत के दिन अल्लाह कहेगा कि "ऐ आदम के बेटे! मैं बीमार पड़ा और तूने मेरी इयादत (देखभाल) नहीं की?" बन्दा पूछेगा, "ऐ अल्लाह! आप तो सारी दुनिया के रब हैं भला मैं आपकी इयादत कैसे करता?" अल्लाह ...

28 Piyarai Nabi SWA Maaf Forgiving karnai walai thai

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प्यारे नबी (सल्ल.) कैसे थे?                                (28) प्यारे नबी (सल्ल.) माफ़ कर दिया करते थे Piyarai Nabi SWA kaisai thai  Piyarai Nabi SWA Maaf (Forgiving) karnai walai thai  अल्लाह के नबी (सल्ल.) की अच्छी खूबियों में से एक बड़ी खूबी सब्र करना और माफ़ कर देना भी है। आप (सल्ल.) ने हमेशा माफ़ी और दरगुज़र से काम लिया है। हज़रत आइशा (रज़ि.) फ़रमाती हैं कि "नबी (सल्ल.) ने कभी किसी से अपने निजी मामले में बदला नहीं लिया।” क़ुरैश ने आप (सल्ल.) को गालियाँ दीं, मार डालने की धमकी दी, रास्ते में काँटे बिछाए, पाक बदन पर गन्दगी डाली, गरदन में फन्दा डालकर घोटने की कोशिश की, आप (सल्ल.) की शान में हर तरह की गुस्ताख़ियाँ की, तौबा-तौबा! आप (सल्ल.) को पागल, जादूगर और शायर कहा, मगर आप (सल्ल.) ने कभी उनकी इन हरकतों पर नाराजगी नहीं दिखाई, बल्कि हमेशा माफ़ कर दिया। और तो और ताइफ़वालों ने आप (सल्ल.) के साथ क्या कुछ नहीं किया, यहाँ तक कि आप (सल्ल.) लहूलुहान (जख़्मी) हो गए, आप (सल्ल.) के जूते खून से भर...

27 Piyarai Nabi SWA bahut Bahadur Brave thai

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प्यारे नबी (स अ व) कैसे थे? (27) प्यारे नबी (स अ व) बहुत बहादुर साहासी निडर थे Piyarai Nabi SWA kaisai thai  Piyarai Nabi SWA bahut Bahadur Brave thai बहुत नर्मदिल और रहमदिल होने के बावजूद प्यारे नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) बहुत ही निडर और बहादुर थे। अल्लाह के डर के अलावा किसी और का डर आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के दिल में न था। बिना किसी संकोच के आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) मुक़ाबले के लिए निकल आते थे। एक बार रात के वक़्त मदीना में कुछ शोर हुआ। मदीनावाले घबरा गए। समझे कि मक्का के क़ुरैश ने अचानक हमला कर दिया है। किसी की हिम्मत न हुई कि बाहर निकलकर हालात मालूम करे। आख़िर में कुछ लोगों ने हिम्मत करके बाहर जाने का इरादा किया तो देखा कि अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) बिल्कुल अकेले वापस आ रहे हैं और सबको तसल्ली देते जा रहे हैं कि "घबराओ नहीं, मैं मदीना से बाहर जाकर देख आया हूँ, कोई डर की बात नहीं है।" हुनैन की जंग में जब दुश्मनों ने चारों तरफ़ से घिराव कर लिया था तो ऊँटनी से उतरकर आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने हमला करनेवालों का जिस निडरता से मुक़ाबला कि...

26 Piyarai Nabi SWA Sacrifice Esaar Qurbani Tiyag Kai aadi thai

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प्यारे नबी (स अ व) कैसे थे? (26) प्यारे नबी (स अ व) ईसार कुर्बानी त्याग के आदी थे Piyarai Nabi SWA kaisai thai  Piyarai Nabi SWA Sacrifice Esaar Qurbani Tiyag Kai aadi thai सखावत का सबसे ऊँचा दर्जा ईसार (त्याग) कहलाता है। इसका मतलब यह है कि अपनी ज़रूरत रोककर दूसरे की ज़रूरत पूरी कर देना। खुद भूखा रहे और दूसरों को खिलाए, खुद तकलीफ़ उठाए और दूसरों को आराम पहुँचाने की कोशिश करे इससे आपस के सम्बन्ध मज़बूत होते हैं, भाईचारा पैदा होता है और फिर अल्लाह भी ख़ुश होता है। अल्लाह के नबी (सल्ल.) की ज़िन्दगी इस तरह के वाक़िआत से भरी पड़ी है। एक बार एक मुसलमान औरत ने अपने हाथ से एक चादर बुनकर नबी (सल्ल.) की ख़िदमत में तोहफ़े के तौर पर पेश की। उस वक़्त आप (सल्ल.) को चादर की बहुत ज़रूरत थी। आप (सल्ल.) ने उस तोहफ़े को क़बूल कर लिया। उसी वक़्त एक सहाबी ने कहा, "ऐ अल्लाह के नबी! यह चादर तो बहुत खूबसूरत है, मुझे इनायत कर दें तो बड़ा अच्छा हो।" प्यारे नबी (सल्ल.) ने ईसार से काम लिया और फ़ौरन वह चादर उन सहाबी को दे दी जबकि आपको ख़ुद ज़रूरत थी, मगर आप (सल्ल.) ने उनकी ज़रूरत को तरजीह दी।...

25 Piyarai Nabi SWA Barabri (Equality) kar bartaw katai thai

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प्यारे नबी (स अ व) कैसे थे? (25)  प्यारे नबी (स अ व) बराबरी का बरताव करते थे Piyarai Nabi SWA kaisai thai ? Piyarai Nabi SWA Barabri (Equality) kar bartaw katai thai अल्लाह के नबी (सल्ल.) की नज़र में अमीर और गरीब, छोटे और बड़े, गुलाम और आक़ा सब बराबर थे आप (सल्ल.) सबके साथ बराबर का सुलूक किया करते थे। आप (सल्ल.) जब सहाबा (रज़ि.) के साथ बैठे होते और कोई चीज़ वहाँ लाई जाती तो बिना किसी फ़र्क के दाईं तरफ़ से उसको बाँटना शुरू कर देते। आप (सल्ल.) अपने लिए भी किसी तरह का कोई फ़र्क पसन्द न करते थे। आप (सल्ल.) हमेशा सबके साथ मिल-जुलकर रहते। दूसरों से हटकर अपने लिए कोई खास जगह भी पसन्द न करते थे। आप (सल्ल.) सबके साथ मिल-जुलकर काम किया करते थे या उनका हाथ बँटाया करते थे। देख लीजिए, अहज़ाब की जंग के लिए तैयारी हो रही है, मदीना की हिफ़ाज़त के लिए खन्दक खोदी जा रही है। तमाम सहाबा खन्दक़ खोद रहे हैं और मिट्टी ला-लाकर बाहर फेंक रहे हैं, वह देखिए नबी (सल्ल.) भी सबके साथ बराबर के शरीक हैं। पाक बदन मिट्टी से अटा हुआ है, तीन दिन का फ़ाक़ा है मगर फिर भी मुस्तैदी (तत्परता) में कोई कमी ...

24 Piyarai Nabi SWA bahut khuddar thai

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प्यारे नबी  (स अ व)  कैसे थे? (24) प्यारे नबी (स अ व) बहुत खुद्दार थे Piyarai Nabi SWA Kaise thai Piyarai Nabi SWA bahut khuddar thai  सिवाय इसके कि जब किसी की ज़रूरत उसे हाथ फैलाने पर बिल्कुल मजबूर कर दे, प्यारे नबी (सल्ल.) सवाल करने और भीख माँगने को बहुत ज़्यादा नापसन्द करते थे। आप (सल्ल.) का इरशाद है कि "अगर कोई व्यक्ति लकड़ी का गठ्ठा पीठ पर लादकर लाए और बेचकर अपनी इज़्ज़त बचाए तो यह इससे अच्छा है कि वह लोगों से सवाल करे।" एक बार एक अंसार आप (सल्ल.) के पास आए और कुछ सवाल किया। आप (सल्ल.) ने पूछा, "तुम्हारे पास कुछ है ?" वे बोले बस एह बिछौना और एक प्याला है।" आप (सल्ल.) ने उन्हें लेकर बेच दिया और पैसे उस अंसारी को देकर कहा, "एक दिरहम का खाना लाकर घर में दे आओ और दूसरे से रस्सी ख़रीद कर जंगल में जाओ, लकड़ी बाँधकर लाओ और शहर में बेच लो।" पन्द्रह दिन के बाद वे अंसारी आए। उनके पास कुछ दिरहम जमा हो गए थे आप (सल्ल.) ने फ़रमाया, "यह अच्छा है या यह कि क़ियामत के दिन चेहरे पर गदागरी (माँगने का) दाग़ लगाकर जाते ?" आप (सल्ल.) ने फ़रमाया, ...

23 Piyarai Nabi SAW bahut Mehman Nawaz thai

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प्यारे नबी (सल्ल.) कैसे थे? (23) प्यारे नबी (सल्ल.) बहुत मेहमान-नवाज़ थे Piyarai Nabi SAW kaisai thai  Piyarai Nabi SAW bahut Mehman Nawaz thai अल्लाह के नबी (सल्ल.) मेहमानों का बहुत ख़याल रखते थे। इस काम के लिए आप (सल्ल.) ने हज़रत बिलाल (रज़ि.) को ख़ास तौर पर नियुक्त कर दिया था ताकि मेहमान की खातिरदारी ठीक से हो सके। बाहर से जो वफ़्द (प्रतिनिधिमण्डल) आते आप (सल्ल.) ख़ुद उनकी खातिर और आवभगत करते थे। अगर उनको कोई माली ज़रूरत होती तो आप (सल्ल.) उसका भी इन्तिज़ाम कर देते। आप (सल्ल.) की खातिरदारी गैर-मुस्लिम और मुसलमान दोनों के लिए आम थी। कोई गैर-मुस्लिम भी आप (सल्ल.) के यहाँ आ जाता तो उसकी ख़ातिरदारी भी मुसलमान मेहमानों की तरह से होती। अकसर ऐसा होता कि घर में खाने-पीने का जो सामान होता वह मेहमानों के सामने रख दिया जाता और आप (सल्ल.) के घरवाले फ़ाक़ा से (बगैर खाए-पिए) रह जाते। एक दिन असहाबे-सुफ़्फ़ा को लेकर आप (सल्ल.) हज़रत आइशा (रज़ि.) के घर पहुँचे (खुद आपके यहाँ कुछ न था) और खाना लाने के लिए कहा। चूनी का पका हुआ खाना लाया गया, फिर छुहारे का हरीरा आया और आखिर में एक बड़े प...

22 Piyarai Nabi SAW Ghamad pasandnahi tha

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प्यारे नबी (स अ व) कैसे थे? (22) प्यारे नबी (स अ व) को घमण्ड पसन्द नहीं था Piyarai Nabi SAW kaisai thai?  Piyarai Nabi SAW ghamad pasandnahi tha इनसान में जब कोई खास खूबी या कमाल पैदा हो जाता है तो क़ुदरती तौर पर वह खुद भी उसे महसूस करने लगता है। यह कोई ख़राब आदत नहीं है, बल्कि इसी को 'फ़न करना' कहते हैं। लेकिन जब वह दूसरे लोगों को जिनमें यह खूबी या कमाल नहीं होता, अपने से जलील या कम दर्जे का समझने लगता है तो इसी को 'घमण्ड' कहते हैं। घमण्ड की आदत को अल्लाह बिलकुल पसन्द नहीं करता। प्यारे नबी (सल्ल.) की खिदमत में एक सुन्दर व्यक्ति हाज़िर हुआ और कहने लगा, "मुझे सुन्दरता पसन्द है और मैं यह नहीं चाहता कि सुन्दरता में कोई भी मुझसे बाज़ी ले जाए। क्या यह घमण्ड है ?" आप (सल्ल.) ने जवाब दिया, "नहीं यह घमण्ड नहीं है। घमण्ड तो यह है कि तुम दूसरों को अपने से हक़ीर (कम दर्जे का) समझो।" एक और मौक़े पर अल्लाह के नबी (सल्ल.) ने फ़रमाया, "जिस व्यक्ति के दिल में राई के दाने के बराबर भी घमण्ड होगा, वह जन्नत में न जाएगा।" अल्लाह हमें इस बुरी आदत से बच...

21 Piyarai Nabi SAW Bhut Narm Mijaz thai

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प्यारे नबी (सल्ल.) कैसे थे? (21)  प्यारे नबी (सल्ल.) बहुत विनम्र स्वभाव के थे Piyarai Nabi SAW kaisai thai ? Piyarai Nabi SAW Bhut Polite Nature tha Narm Mijaz thai अल्लाह के नबी (सल्ल.) कभी सिर उठाकर घमण्ड के अन्दाज़ में नहीं चलते थे। आप हमेशा निगाह नीची रखते थे। जब दूसरों के साथ चलते तो खुद पीछे चलते और दूसरों को आगे कर देते। आप बड़ी खाकसारी (विनम्रता) के साथ बैठते। खाना खाते वक़्त गुलामों की तरह बैठते। आप (सल्ल.) कहा करते थे, "मैं अल्लाह का हुक्म माननेवाला बन्दा हूँ और उसके गुलामों की तरह खाना खाता हूँ। नबी (सल्ल.) जब किसी मजलिस में पहुँचते तो बैठे हुए लोगों के सिरों को फान्दते हुए नहीं जाते थे, बल्कि पीछे की सफ़ (पंक्ति) में जहाँ जगह मिलती बैठ जाते। जब आपको आता देखकर सहाबा इज़्ज़त के लिए खड़े हो जाते तो आप (सल्ल.) कहते, "मेरी इज़्जत के लिए खड़े होकर अजमियों (गैर-अरबवालों) की नक़ल न करो।" मक्का की विजय के अवसर पर जब आप शहर में दखिल हो रहे थे तो आजिज़ी और विनम्रता से अपने पाक सिर को इतना झुका लिया था कि वह ऊँट के कजावे को छू रहा था। एक व्यक्ति आप (सल्ल.) के...

20 Piyarai Nabi SAW Bahut dariya Dil thai dayalo thai

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प्यारे नबी (स.अ.व) कैसे थे? (20) प्यारे नबी (स.अ.व ) बहुत दरियादिल थे Piyarai Nabi SWA kaisai thai Piyarai Nabi SWA Bahut Dariya Dil thai  Piyarai Nabi SAW Kaisai thai Piyarai Nabi SAW Bahut dariya Dil thai dayalo thai  प्यारे नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) सख़ावत के दरिया थे। सवाल करनेवाले को ख़ाली हाथ वापिस करना आप जानते ही न थे। अगर उस वक़्त आपके पास कुछ न होता तो आगे उसे देने का वादा कर लेते। एक दिन अस्र की नमाज़ पढ़कर मामूल (नियम) के ख़िलाफ़ आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) घर के अन्दर गए और फिर फ़ौरन वापिस भी आ गए। सहाबा को बहुत हैरत हुई। आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने उनकी हैरत को दूर करने के लिए कहा, "कुछ सोना घर में पड़ा रह गया था। रात होने को आई, इसलिए उसे ख़ैरात (दान) कर देने को कहने गया था।" एक बार बहरैन से ख़िराज (लगान) आया, उसमें इतने ज़्यादा रुपए थे कि इससे पहले कभी नहीं आए थे। नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने मस्जिद के सेहन में बैठकर बाँटना शरू कर दिया। शाम होने से पहले ही आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) दामन झाड़कर उठ खड़े हुए। नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्...

19 Piyarai Nabi SAW kaisai thai Piyarai Nabi SAW mamlai Kai saaf thai

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प्यारे नबी (सल्ल.) कैसे थे? (19) प्यारे नबी (सल्ल.) मामले के साफ थे Piyarai Nabi SWA kaisai thai Piyarai Nabi SWA Mamlai Kai Saaf thai Piyarai Nabi SAW kaisai thai ? Piyarai Nabi SAW mamlai Kai saaf thai      अल्लाह के नबी (सल्ल.) की अमानतदारी और मामलात (लेन-देन) की सफाई की चर्चा बयान से बाहर है। ये खूबियाँ आप (सल्ल.) की पाक ज़ात में इस तरह नुमायाँ थीं कि आप (सल्ल.) के दुश्मन भी उनका इनकार न कर सके। यही वजह है कि "सादिक़" (सच्चा) और "अमीन" (अमानतदार) की उपाधि आपको खानदानवालों ने नहीं, दोस्तों ने नहीं, बल्कि आप (सल्ल.) के दुश्मनों ने दी थी और वे इसी उपाधि से आपको पुकारा करते थे। मक्का के मुश्रिकों के दिल आप (सल्ल.) की तरफ़ से ईर्ष्या, नफ़रत और दुश्मनी से भरे हुए थे मगर अपनी अमानतें (रुपया-पैसा, ज़ेवर आदि) वे आप (सल्ल.) ही के हवाले कर के सन्तुष्ट होते थे आप (सल्ल.) के सिवा वे किसी दूसरे पर भरोसा नहीं करते थे। आपको याद होगा कि मक्का से हिजरत करते वक़्त भी अल्लाह के नबी (सल्ल.) ने दुश्मनों की अमानतों को वापस करने का कितना अच्छा इन्तिज़ाम किया था। एक बार नबी ...

18 Piyarai Nabi SAW Kaisai thai Piyarai Nabi SAW dosro Kai kaam atai thai

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प्यारे नबी (स अ व) कैसे थे? (18) प्यारे नबी (स अ व) दूसरों के काम आते थे Piyarai Nabi SAW Kaisai thai? Piyarai Nabi SAW dosro Kai kaam atai thai  दूसरों के बुरे वक़्त में काम आना, उनकी मदद करने के लिए हर वक़्त तैयार रहना, यह प्यारे नबी (सल्ल.) की एक नुमायाँ खूबी थी, आप (सल्ल.) जनसेवा का नमूना थे। एक बार हज़रत ख़ब्बाब बिन अरत (रज़ि.) किसी युद्ध में गए हुए थे। उनके घर में कोई और मर्द न था। औरतों को दूध दुहना नहीं आता था। आप (सल्ल.) हर रोज़ उनके घर जाते और दूध दुह आया करते थे। एक बार प्यारे नबी (सल्ल.) नमाज़ के लिए नीयत बाँधने जा रहे थे कि एक बद्दू  (देहाती) आया। वह आप (सल्ल.) का दामन पकड़कर बोला, " मेरी एक छोटी-सी ज़रूरत रह गई है, मैं भूल जाऊँगा, उसे इसी वक़्त पूरा कर दीजिए।" आप (सल्ल.) उसी वक़्त उसके साथ गए, उसका काम कर दिया और फिर वापस आकर नमाज़ पढ़ी। विधवाओं और यतीमों, असहाय और लाचार लोगों की मदद करना न आप (सल्ल.) कोई बुराई समझते थे और न ऐसा करने में थकते थे, बल्कि उनकी सेवा करके इत्मीनान, सुकून और खुशी महसूस करते थे। सहाबा (रज़ि.) को भी आप इसकी हिदायत करते रहते थ...

17 Piyarai Nabi SAW Kaisai thai? Piyarai Nabi SAW Hainaisha achcha soluk kartai thai

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प्यारे नबी (स अ व) कैसे थे? (17) प्यारे नबी (स अ व) हमेशा अच्छा सुलूक करते थे  Piyarai Nabi SWA kaisai thai Piyarai Nabi SWA Hamesha Achcha Solok Kiya kartai thai  Piyarai Nabi SAW Kaisai thai? Piyarai Nabi SAW Hainaisha achcha soluk kartai thai  नबी (सल्ल.) हर एक से बहुत अख़्लाक़ से मिलते थे। पास बैठे हुए हर व्यक्ति से आप (सल्ल.) इस तरह बोलते थे जैसे सबसे ज़्यादा आप उसी से मुहब्बत करते हैं, और हर व्यक्ति यही महसूस करने लगता कि जैसे नबी (सल्ल.) सबसे ज़्यादा उसी को चाहते हैं। जब कोई व्यक्ति कोई बात मालूम करता तो आप (सल्ल.) मुस्कराते हुए उसका जवाब देते। जब किसी ख़ानदान या क़बीले का कोई बा-इज़्ज़त आदमी आप (सल्ल.) के पास आता तो उसके पद के लिहाज़ से उसकी इज़्ज़त करते लेकिन दूसरों को नज़र-अन्दाज़ भी नहीं करते थे।  एक बार नबी (सल्ल.) हज़रत हसन (रज़ि.) को गोद में लिए प्यार कर रहे थे। एक सहाबी ने कहा, "ऐ अल्लाह के रसूल! मैं तो अपनी औलाद का बोसा भी नहीं लेता।" आप (सल्ल.) कहा, अगर अल्लाह तुम्हारे दिल से मुहब्बत को छीन ले तो मैं क्या करूँ।"  जब नबी (सल्ल.) सहाबा...

16 Piyarai Nabi SWA Dost ka khayal Rakhtai thai

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प्यारे नबी (स.अ.व) कैसे थे? (16) प्यारे नबी (स.अ.व) दोस्तों का ख़याल रखते थे Piyarai Nabi SWA kaisai thai Piyarai Nabi SWA Dost ka khayal Rakhtai thai Piyarai Nabi SAW kaisai thai ? Piyarai Nabi SAW Dosto ka khayal rakhtai thai  नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) अपने साथियों से बहुत मुहब्बत करते थे। आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) कहा करते थे कि सच्चा मुसलमान वह है जो अपने दोस्तों से सच्ची मुहब्बत करे और उसके दोस्त उससे मुहब्बत करें। आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की सीरत को पढ़ने से हमें दोस्ती के बारे में नीचे दी हुई हिदायात मिलती हैं:- 1. हमेशा नेक, शरीफ़ और सच्चे व्यक्ति से दोस्ती करनी चाहिए। 2. दोस्ती सच्चाई के साथ करनी चाहिए, उसमें कोई मतलब या ग़रज़ शामिल न हो। 3. दोस्तों पर भरोसा करना चाहिए। उनके साथ ख़ैरख़ाही और वफ़ादारी का मामला करना चाहिए। 4. दोस्तों की ख़ुशी और दुख-दर्द में हमेशा शरीक रहें और उनसे मुस्कराते हुए मिलें। 5. अगर वे किसी मामले में सलाह माँगें तो ईमानदारी और सच्चे दिल से सलाह दें। 6. दोस्त की तरफ़ से अगर कोई बात मिज़ाज के ख़िलाफ़ भी हो तो ज़बान पर क़ाबू रखे...

15 Piyarai Nabi kaisai thai ? Piyarai Nabi SAW Ko Safayi aur Sadgi Pasand thi

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प्यारे नबी (सल्ल.) कैसे थे (15) प्यारे नबी (सल्ल.) को सफ़ाई और सादगी पसन्द थी Piyarai Nabi SWA kaisai thai ? Piyarai Nabi SAW Ko Safayi aur Sadgi Pasand thai प्यारे नबी (सल्ल.) सफाई, सुथराई और पाकीज़गी का बहुत खयाल रखते थे। इसी लिए तो आप (सल्ल.) ने फरमाया है: "सफ़ाई आधा ईमान है।" एक बार एक व्यक्ति बहुत ही मैले कपड़े पहनकर आपके पास आया तो आप (सल्ल.) ने फ़रमाया, "क्या यह आदमी अपने कपड़े धोने की तकलीफ़ भी नहीं उठा सकता?" एक बार एक खुशहाल (धनवान) व्यक्ति आपके पास आया। वह बहुत ही घटिया कपड़े पहने हुए था। आप (सल्ल.) ने उससे कहा, 'अल्लाह ने तुमको माल और दौलत दी है, उसका इज़हार तुम्हारी ऊपरी हालत से भी होना चाहिए।" मस्जिद की दीवारों पर अगर थूक वगैरा के निशान आप (सल्ल.) देखते तो आप (सल्ल.) को बहुत ख़राब लगता। आप (सल्ल.) खुद छड़ी से खुरचकर उसे साफ़ कर देते। मस्जिद में खुशबू के लिए लोबान वग़ैरा जलाने की हिदायत करते। प्यारे नबी (सल्ल.) ख़ुद भी सादा ज़िन्दगी गुज़ारते थे और सहाबा (रज़ि.) को भी इसी की नसीहत करते। आप (सल्ल.) अपना काम खुद कर लिया करते थे। इस्लाम...

14 Piyarai Nabi SAW Kaisai thai ? Piyarai Nabi SAW Salam karnai mai Pehal kartai thai

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प्यारे नबी (सल्ल.) कैसे थे? (14) प्यारे नबी (सल्ल.) सलाम करने में पहल करते थे Piyarai Nabi SWA kaisai thai Piyarai Nabi SWA Salam karnai mai pehl kartai thai Piyarai Nabi SAW Kaisai thai ? Piyarai Nabi SAW Salam karnai mai Pehal kartai thai  अल्लाह के नबी (सल्ल.) को सलाम करने की आदत बहुत पसन्द थी। आप (सल्ल.) सलाम करने में हमेशा पहल करते थे। आप (सल्ल.) ने फ़रमाया, "तीन बातें जिस किसी में एक साथ जमा हो गईं, (समझ लो) उसमें ईमान जमा हो गया - (1) अपने नफ़्स के साथ इंसाफ़ करना (2) हर जाने-अनजाने को सलाम करना (3) तंगी में अल्लाह के नाम पर खर्च करना।"  (हदीस: बुखारी) प्यारे नबी (सल्ल.) का तरीक़ा था कि जब कहीं वे जाते, सलाम करते। आप (सल्ल.) ने फ़रमाया,  "अगर कोई सलाम से पहले कुछ पूछे तो जवाब मत दो। एक बार कुछ लड़के खेल रहे थे, उनके पास से प्यारे नबी (सल्ल.) गुज़रे तो आप (सल्ल.) ने उनको सलाम किया। (हदीस:मुस्लिम) प्यारे नबी (सल्ल.) सलाम का जवाब हमेशा ज़बान से दिया करते थे। हाथ या उँगली के इशारे या सिर्फ़ सिर हिलाकर जवाब न देते। जब कोई किसी दूसरे का सलाम आकर पहुँचाता तो ...

13 Piyarai Nabi SWA Chink (Sneeze) aur Jamahi (Yawn)

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प्यारे नबी (स अ व) कैसे थे? (13) प्यारे नबी (स अ व) छींक और जमाही (उबासी) कैसे लेते थे ?  Piyarai Nabi SWA kaisai thai Piyarai Nabi SWA Chink ( Sneeze) aur Jamahi (Yawn) kaisai laitai thai Piyarai Nabi SAW Kaisai Thai ? Piyarai Nabi SAW chink (Sneeze) aur Jamahi  (Ywan) kaisai laitai thai हज़रत अबू हुरैरा (रज़ि.) से रिवायत है कि जब नबी (सल्ल॰) छींक लेते तो मुँह पर हाथ या कपड़ा रख लेते जिससे या तो आवाज़ बिल्कुल दब जाती या बहुत कम हो जाती। एक और हदीस में है कि "ऊँची जमाही और ऊँची छींक शैतान की तरफ़ से है, अल्लाह इन दोनों को नापसन्द करता है।" एक बार एक व्यक्ति को आप (सल्ल.) के सामने छींक आई। आप (सल्ल.) ने يرحمك الله “यरहमुकल्लाह" (अल्लाह तुमपर रहम करे) कहा। थोड़ी देर बाद उसे फिर छींक आई तो आप (सल्ल.) ने कुछ नहीं कहा बल्कि फ़रमाया, "इसे जुकाम है।" सही हदीस में है कि "अल्लाह छींक को दोस्त रखता है और जमाही से नफ़रत करता है (क्योंकि यह काहिली और सुस्ती की निशानी है)। जब छींक आए तो الحمد لله"अल्हमदुलिल्लाह" (अल्लाह का शुक्र है) कहो, दूसरे को छ...

12 Nabi SAW Ka Libas Kaisaa Tha?

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प्यारे नबी (स अ व) कैसे थे? (12)  प्यारे नबी (स अ व) का लिबास कैसा था ? piyarai Nabi SAW Kaisai Thai? Piyarai Nabi SAW Ka Libas Kaisaa Tha?   लिबास के बारे में नबी (सल्ल.) का तरीक़ा यह था कि आप (सल्ल.) किसी ख़ास तरह के कपड़े के पाबन्द न थे, बल्कि हर वह कपड़ा जो सतर (वह अंग जिसका खोलना मना हो) को पूरी तरह छुपा सके आप (सल्ल.) इस्तेमाल करते थे। आप (सल्ल.) ने अच्छे से अच्छे कपड़े भी पहने हैं और मामूली से मामूली भी, यहाँ तक कि पैवन्द लगे कपड़े भी पहने हैं। जो लोग परहेज़गारी के ख़याल से अच्छे कपड़े और अच्छे खाने को मना करते हैं, या जो लोग मोटे-झोटे खाने-कपड़े को घमण्ड की वजह से नापसन्द करते हैं, दोनों का तरीक़ा प्यारे नबी (सल्ल.) के तरीक़े से अलग है। नबी (सल्ल.) हमेशा बीच का रास्ता अपनाते थे। अल्लाह के नबी (सल्ल.) ने फ़रमाया, "जो कोई दुनिया में अपनी नेक-नामी के लिए कपड़े पहनेगा (चाहे अच्छा कपड़ा हो या फटा-पुराना हो) आख़िरत (परलोक) में अल्लाह उसे ज़िल्लत और बे-इज़्ज़ती का लिबास पहनाएगा।" आप (सल्ल.) ने यह भी फ़रमाया, "जिस किसी ने घमण्ड से अपने कपड़े का दामन बड़ा रखा, ...

11 Piyarai Nabi SWA balo khayal rakhtai thai

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  प्यारे नबी (स अ व ) कैसे थे? (11) प्यारे नबी (स अ व) बालों का ख़याल रखते थे  Piyarai Nabi SWA kaisai thai  Piyarai Nabi SWA balo khayal rakhtai thai Piyarai Nabi SAW kaisai thai ? Piyarai Nabi SAW Balo ka khayal rakhtai tha! अल्लाह के नबी (सल्ल.) के सिर के बाल बिखरे हुए और उलझे हुए नहीं रहते थे कि जिन्हें देखकर वहशत पैदा हो। आप (सल्ल.) बालों में अकसर तेल डाला करते थे और कंघा करते थे। आखिरी वक़्त में आप (सल्ल.) माँग भी निकालने लगे थे आप (सल्ल.) की दाढ़ी के बाल भी उलझे हुए नहीं रहते थे बल्कि उनमें भी आप कंघी करते थे। एक बार आप (सल्ल.) ने एक व्यक्ति के बाल बहुत उलझे देखे तो कहा कि इससे इतना भी नहीं हो सकता कि बालों को ठीक कर ले। आप (सल्ल.) दाँतों की सफ़ाई का भी बहुत ख़याल रखते थे। पाँचों वक़्त वुज़ू करते हुए आप (सल्ल.) मिस्वाक ज़रूर करते थे। आप (सल्ल.) ने फ़रमाया कि "मिस्वाक मुँह की सफ़ाई और अल्लाह की रज़ामन्दी है।                   (जारी है) आलम ए इस्लाम की ख़बर, दीनि ए इस्लाम की मालुमात हासिल करने के लिए चैनल ज...

10 Piyarai Nabi SWA bahut taiz chaltai thai

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 प्यारे नबी स अ व कैसे थे? (10) प्यारे नबी स अ व बहुत तेज़ चलते थे  Piyarai Nabi SWA kaisai thai  Piyarai Nabi SWA bahut taiz chaltai thai प्यारे नबी (सल्ल.) की चाल बहुत तेज़ थी। आप (सल्ल.) चलते तो मज़बूती से क़दम जमाकर चलते। ढीले-ढाले अन्दाज़ में क़दम घसीट कर न चलते। बदन सिमटा हुआ रहता। कुव्वत से आगे क़दम बढ़ाते। आप (सल्ल.) का पाक जिस्म बहुत थोड़ा-सा आगे झुका हुआ रहता। ऐसा मालूम होता कि ऊँचाई से नीचे की तरफ़ आ रहे हों। हज़रत अली (रज़ि.) फ़रमाते हैं कि नबी (सल्ल.) जब चलते तो इस तरह चलते कि जैसे पहाड़ की ढाल पर से उतर रहे हों। आप (सल्ल.) की चाल शराफ़त, बड़ाई और ज़िम्मेदारी के एहसास की जीती-जागती तस्वीर थी। आप (सल्ल.) के चलने का तरीका हमें यह पैग़ाम देता था कि जमीन पर घमण्ड की चाल न चलनी चाहिए। आप (सल्ल.) की रफ़्तार के बारे में हज़रत अबू हुरैरा (रज़ि.) कहते हैं कि "आप (सल्ल.) मामूली रफ़्तार से चलते तब भी हम मुश्किल ही से साथ दे पाते थे।" आप (सल्ल.) का दस्तूर था कि जब सहाबा साथ होते तो आप (सल्ल.) उनको या तो साथ कर लेते या आगे कर दिया करते थे।      ...

9 Piyarai Nabi SWA Raham Dil thai

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प्यारे नबी स अ व कैसे थे? 9 प्यारे नबी स अ व रहमदिल थे Piyarai Nabi SWA kaisai thai  Piyarai Nabi SWA Raham Dil thai  अच्छे अख़्लाक़ की बुनयादी सिफ़ात में से एक सिफ़त रहमदिली है। यह रहमदिली हमें नेकी करने पर उभारती है। यही भावना हमें दूसरों पर अत्याचार करने से रोकती है और अच्छा व्यवहार करने पर उभारती है, बुरे बरताव करने से बचाती है। प्यारे नबी (सल्ल.) ने फ़रमाया, "जो रहम नहीं करता उसपर रहम नहीं किया जाता, तुम ज़मीनवालों पर रहम करो तो आसमानवाला तुमपर रहम करेगा।" सिर्फ इनसानों ही के साथ नहीं बल्कि बेज़बान जानवरों पर भी रहम करने का हुक्म दिया गया है। मनोरंजन और खेल के तौर पर जो लोग जानवरों को लड़ाते हैं जिससे वे ज़ख़्मी हो जाते हैं, प्यारे नबी (सल्ल.) ने इसको मना किया है। ज़बह करने से पहले जानवर को पानी पिलाने और छुरी को तेज़ कर लेने की हिदायत दी गई है। एक बार एक सहाबी चिड़िया के बच्चों को पकड़ लाए। चिड़िया चूँ-चूँ' करती उनके पीछे-पीछे आई। नबी (सल्ल.) ने जब यह देखा तो सहाबी से कहा कि बच्चे को उसके घोंसले में रख आओ। आइए हम भी अहद करे कि हम हर एक के साथ भलाई और रहम...

8 Piyarai Nabi SWA bahut sharmilai thai

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  प्यारे नबी स अ व कैसे थे  (8) प्यारे नबी स अ व बहुत शर्मीले थे Piyarai Nabi SWA kaisai thai  Piyarai Nabi SWA bahut sharmilai thai  लाज और शर्म इनसान की फ़ितरत में है। यही वह गुण है जिससे हमारे अन्दर बहुत-सी खूबियाँ पैदा होती हैं और परवरिश पाती हैं और हम बहुत-सी बुराइयों से बचे रहते हैं। इसी लिए तो कहा गया है कि "शर्म ईमान का एक भाग है," जिसमें लाज और शर्म नहीं वह ईमानदार नहीं। प्यारे नबी (सल्ल.) ने फ़रमाया, "नंगे होने से बचो क्योंकि तुम्हारे साथ हर समय अल्लाह के फ़रिश्ते रहते हैं, मगर जब तुम पेशाब-पाखाने को जाते हो तो वह अलग हो जाते हैं, तो तुम उनसे शर्म करो और उनका खयाल रखो।" आप को प्यारे नबी (सल्ल.) के बचपन की वह घटना तो याद होगी जब काबा की दीवार बनाई जा रही थी। बड़ों के साथ बच्चे भी अपने कन्धों पर पत्थर रखकर ला रहे थे। प्यारे नबी (सल्ल.) भी उनमें शरीक थे। जब कन्धे दुखने लगे तो लड़कों ने अपने-अपने तहबन्द खोलकर कन्धों पर रख लिए। नबी (सल्ल.) के चचा ने आप (सल्ल.) से ऐसा ही करने को कहा। जब बहुत ज़ोर देकर कहा तो मजबूरी की हालत में आप (सल्ल.) ने अपना ...